जंगल खास में ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान’ कार्यक्रम आयोजित,  किसानों ने रेशम विभाग के अधिकारियों के समक्ष रखीं समस्याएं

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जंगल खास में ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान’ कार्यक्रम आयोजित,  किसानों ने रेशम विभाग के अधिकारियों के समक्ष रखीं समस्याएं

हमीरपुर। रेशम विभाग द्वारा ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान’ (MRMA) के तहत आज ग्राम पंचायत जंगल खास में स्थित रेशम विभाग केंद्र जंगल बैरी में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्तर से पहुंचे अधिकारियों ने स्थानीय लोगों और रेशम पालकों को रेशम के कीड़े (कोंथा) के पालन-पोषण, उत्पादन तथा इससे जुड़ी विभिन्न गतिविधियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी।

कार्यक्रम के दौरान स्थानीय किसानों और रेशम पालकों ने अधिकारियों के समक्ष रेशम पालन से जुड़ी अपनी विभिन्न समस्याओं और मांगों को प्रमुखता से रखा। किसानों का कहना था कि रेशम पालन से उन्हें रोजगार और आय का बेहतर साधन मिल सकता है, लेकिन विभागीय स्तर पर कई समस्याओं के कारण वे इस कार्य को लगातार जारी रखने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

किसानों ने प्रमुख रूप से रेशम के उचित रेट की समस्या उठाई। उनका कहना था कि वर्तमान में रेशम का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है, जिससे मेहनत के अनुरूप आमदनी नहीं हो रही है।

इसके अलावा किसानों ने बताया कि जंगल बैरी रेशम विभाग केंद्र में कोई स्थायी इंस्पेक्टर नहीं है। नादौन से एक महिला अधिकारी को यहां का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है, लेकिन किसानों के अनुसार वह नियमित रूप से केंद्र पर नहीं आती हैं, जिसके कारण उन्हें अपनी समस्याओं के समाधान के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है।

रेशम पालकों ने पिछले चार वर्षों से लंबित भुगतान का मुद्दा भी अधिकारियों के समक्ष रखा। किसानों ने बताया कि कई लोगों की फाइलें चार साल पहले जमा हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक उन्हें पूरी राशि नहीं मिली है। किसी को एक किश्त, किसी को दो किश्तें मिली हैं, जबकि कुछ लाभार्थियों को अभी तक एक भी किश्त प्राप्त नहीं हुई है।

इसी तरह रेशम के पौधे लगाने के लिए मिलने वाली राशि का भुगतान भी कई लोगों को पिछले चार-पांच वर्षों से नहीं मिलने की बात किसानों ने कही। वहीं, पत्ता कटिंग का कार्य करने वाली कई महिलाओं को भी अभी तक उनकी राशि का भुगतान नहीं हुआ है।

किसानों ने अधिकारियों से मांग की कि इन सभी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए, लंबित भुगतानों को जारी किया जाए, जंगल बैरी केंद्र में स्थायी कर्मचारी की व्यवस्था की जाए और रेशम का उचित मूल्य किसानों को मिले।

किसानों ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार और विभाग उनकी प्रमुख मांगों को पूरा करते हैं तथा लंबित भुगतान का निपटारा किया जाता है, तो वे दोबारा बड़े स्तर पर रेशम के कीड़े पालने के लिए तैयार हैं।

कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने किसानों की समस्याओं को सुना और उनकी मांगों को संबंधित स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।

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